पत्नी ने साथ रहने से इंकार कर दिया है लेकिन विवाह विच्छेद भी नहीं करना चाहती है। मेरे विवाह के लगभग 18 वर्ष हो गये हैं और इन 18 वर्षों में हम लोग कभी भी सुख पूर्वक नहीं रह पाये हैं। मेरी पत्नी बहुत झगड़ालू प्रवृत्ति की है। वह हर समय अपने मायके मे रहना पसंद करती है और अपने मायके वालों का पक्ष लेती रहती है। वह हर समय मुझे नीचा दिखाती है जिसके कारण मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। मेरे 3 बच्चे हैं लेकिन वे सब अपनी माँ के पक्ष में ही रहते हैं। मैंने बहुत प्रयास किया कि सभी को समझा कर अपने साथ रखे लेकिन वे सभी मुझसे दूर ही रहना चाहते हैं। काफी प्रयासों के बाद भी मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहना चाहती है। इस परिस्थिति में क्या करना चाहिए? मैं भी अब अलग रहना चाहता हूँ। म्यूच्यूअल डाइवोर्स के बारे में सुझाव दें।
पूछा गया: उत्तर प्रदेश से
आपके विवाह के 18 वर्ष हो गये हैं और आपके वैवाहिक संम्बंध कभी भी मधुर नहीं रहे जिसके कारण विवाह लगभग समाप्त सा हो गया है। आपकी पत्नी ने साथ रहने से इंकार कर दिया है लेकिन विवाह विच्छेद भी नहीं करना चाहती है, तो ऐसी परिस्थिति में आपसी सहमति द्वारा विवाह विच्छेद काफी कठिन प्रतीत हो रहा है। फिर भी आपको अपनी पत्नी से वार्ता करना चाहिए, ताकि आपसी सहमति द्वारा विवाह विच्छेद कर सकें।
सहमति द्वारा विवाह विच्छेद, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के धारा 13 बी के अन्तर्गत प्रदान किया गया है। इसके अधीन विवाह विच्छेद का वाद दाखिल करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों को साबित करना अनिवार्य है:
- विवाह के पक्षकार 1 वर्ष से अधिक समय से पृथक रह रहें हों, और
- उनका एक साथ रहना संभव नहीं है, और
- वे आपस मे सहमत हो गये हैं कि उनका विवाह समाप्त कर दिया जाना चाहिए
उपरोक्त तथ्यों के साबित होने पर न्यायालय द्वारा पक्षकारों का विवाह विच्छेदित कर दिया जायेगा। धारा 13 बी के तहत किसी भी पक्षकार को दोष साबित नहीं करना होता इसलिये विवाह विच्छेद सरल और त्वरित हो जाता है।
आपकी पत्नी बार-बार आपको छोड़कर अपने मायके चली जाती है। यह कृत्य स्वत: साबित करता है कि वह अपने वैवाहिक दायित्वों का पालन नहीं कर रही है। आपकी पत्नी का उक्त कृत्य अभित्यजन और क्रूरता की श्रेणी में आता है। आपकी पत्नी पृथक निवास करना चाहती है लेकिन विवाह समाप्त नहीं करना चाहती, अत: बहुत क्षीण संभावना है कि वह आपसी सहमति से विवाह विच्छेद करने को राजी होगी।
ऐसी परिस्थिति में आप हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के धारा 13 के अंतर्गत अभित्यजन और क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद का वाद दाखिल कर सकते हैं। आपके मामले में धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद हो सकता है। यदि आपके द्वारा पत्नी की क्रूरता या अभित्यजन या दोनों साबित कर दिया जाता है तो विवाह विच्छेद निश्चित है इसमें पत्नी का सहमति मायने नहीं रखता है।
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